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नीतीश कुमार बंधक बनाए गए होते तो?

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: अभय यादव की मौत का जिम्मेदार कौन : अभय यादव बिहार का सिपाही था. उसको नक्सलियों ने बंधक बना लिया था. उसके बाद उसकी हत्या कर दी. नक्सलियो ने पहले 12 घंटे का समय दिया. फिर 24 घंटे का. सरकार ने कुछ नहीं किया.

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दो अनब्याही माताओं के बहाने

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अनुष्का शंकर और निरूपमा पाठक। दो महिलाएं। दोनों अनब्याही मां। दोनों के साथ अलग-अलग व्यवहार। अनुष्का शंकर ने पिछले दिनों ऐलान किया कि वह मां बनने वाली है। एम्स ने निरुपमा पाठक के बारे में बताया कि वह प्रिगनेंट थी।

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चोर नेताओं ने अखबार पर हमला बोला

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अगर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्याय किया और एमपी विधानसभा के अपने रिकॉर्ड पर कार्रवाई की तो इस प्रदेश के कई विधायक जालसाजी के आरोप में जेल जाएंगे। उनने फर्जी यात्रा बिल के जरिए बेशर्मी से करोड़ों रुपए की चोरी की है।

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जागरण ने फिर शुरू की 'अयोध्या राजनीति'!

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लगता है फिर काले दिन लौट रहे हैं। दैनिक जागरण में 31 अगस्त 2010 को प्रादेशिक खबरों के पेज पर ‘आईएसआई बिगाड़ सकती है माहौल’ सुर्खी से छपी खबर से लगता है कि यह अखबार 1992 की अपनी करतूतों दोहराने पर उतारु है।

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रवीश कुमार की झूठी रिपोर्ट का सच

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शाम के चार बज रहे थे। ढाबे वाले को बार-बार दबाव डाल रहा था कि जल्दी कुछ भी बना दीजिए। सुबह नाश्ता भी नहीं किया था। पेट जल रहा था। बगल की कुर्सी पर ढाबे का मालिक भी आकर बैठ गया था। तभी सामने से एक शख्स शराब के नशे में धुत ख़ुद को संभालता हुआ मेरे पास आने लगा। आकर बैठ गया। आप हैं। आपको टीवी पर देखता हूं। अच्छा लगता है। ठीक बात करते हैं आप। वो इतना होश में था कि मुझे पहचान रहा था। कहने लगा कि मैं ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में क्लर्क हूं (मैं सही पदनाम नहीं दे रहा हूं)।

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यह 'इमोशनल अत्याचार' है या सेक्स अत्याचार!

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आजकल 'बिंदास टीवी' पर प्रसारित कार्यक्रम 'इनोशनल अत्याचार' अश्लीलता का अखाड़ा बना हुआ है. विशेषकर युवा वर्ग, जो कि खुद इस कार्यक्रम के केंद्र में है, इस प्रोग्राम को लेकर काफी उत्सुक दिखता है. क्या यह कार्यक्रम सच में किसी पर हुए 'इमोशनल अत्याचार' को दिखाता है? प्रोग्राम को किसी भी दृष्टिकोण से देखकर ऐसा तो नजर बिल्कुल नही आता, इसे देखकर तो यही लगता है कि यह केवल सेक्स की बात ही दर्शकों को दिखाता है. हर एपिसोड में एक लड़का और लड़की केवल किस करते या सेक्स की बातें ही करते नजर आते हैं. भावानाएँ तो कहीं भी नजर नहीं आती है?

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बीत जाये बीत जाये जनम अकारथ

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गांव में पेड़ पर सोने का सुखजीवन के 37 साल पूरे हो जाएंगे आज. 40 तक जीने का प्लान था. बहुत पहले से योजना थी. लेकिन लग रहा है जैसे अबकी 40 ही पूरा कर लिया. 40 यूं कि 40 के बाद का जीवन 30 से 40 के बीच की जीवन की मनःस्थिति से अलग होता है. चिंताएं अलग होती हैं. जीवन शैली अलग होती है. लक्ष्य अलग होते हैं. सोच-समझ अलग होती है.

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हिन्दी न्यूज़ चैनलों पर स्पीड न्यूज का हमला

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रवीश कुमार: हिन्दी पत्रकारिता का दनदनाहट काल : अचानक से हिन्दी न्यूज़ चैनलों पर स्पीड न्यूज का हमला हो गया है। कार के एक्सलेटर की आवाज़ लगाकर हूं हां की बजाय ज़ूप ज़ाप करती ख़बरें। टीवी से दूर भागते दर्शकों को पकड़ कर रखने के लिए यह नया फार्मूला मैदान में आया है। वैसे फार्मूला निकालने में हिन्दी न्यूज़ चैनलों का कोई जवाब नहीं। हर हफ्ते कोई न कोई फार्मेट लांच हो जाता है। कोई दो मिनट में बीस ख़बरें दिखा रहा है तो कोई पचीस मिनट में सौ ख़बरें।

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