सीनियर्स बनें मार्गदर्शक न कि राजनीतिज्ञ : अमृतसर क्षेत्र में पत्रकारिता करते हुए मुझे तीन साल हो चुके हैं। इस दौरान मैंने 6 महीने लोकल चैनल, दो साल भास्कर में स्टिंगर के तौर पर फुल टाइम काम किया और अब दैनिक उतम हिंदू में स्टाफ रिपोर्टर की भूमिका निभा रहा हूं। इन तीन सालों के दौरान मेरे साथ ऐसे 18 युवाओं ने भी काम किया, जो आज पत्रकारों के अभद्र व्यवहार के कारण इस क्षेत्र से कोसों दूर जा चुके हैं। इस क्षेत्र में काम करने के दौरान कइयों के साथ तो ऐसा व्यवहार किया गया, जिसके कारण वे आज मानसिक रोगी भी हो चुके हैं। इसमें से दो लड़किया थीं।
एक बार मेरे सीनियर ने मुझे जबरदस्ती मेंटल हास्पिटल ले जाने की जिद से आफिस में बखेड़ा भी खड़ा किया। मैं नौकरी नहीं छोड़ सकता था क्योंकि मेरी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। आज मैं अपनी एजुकेशन के साथ-साथ इस क्षेत्र में बिना रुके सक्रिय हूं, इसके लिए मैं कई वरिष्ठों का आभारी हूं। अगर मुझे प्रताड़ित न किया जाता तो कई चीजें मैं सीख न पाया होता, देश-दुनिया और दुनियादारी का ज्ञान न हो पाता। 2010 की शुरुआत में मेरी एक ऐसे युवक से मुलाकात हुई, जो पत्रकारिता करने के लिए किसी बड़ी कंपनी में 14,000 रुपये की जॉब छोड़कर प्रिंट मीडिया के एक बड़े ग्रुप के साथ जुड़ गया और 1000 रुपये महीने में काम करने लगा। लेकिन बाद में गलती का अहसास होने पर उसने घर का रास्ता नाप लिया। ऐसे कई नए चेहरे हर साल कालेज पास करने के बाद प्रिंट एंव इलेक्ट्रानिक मीडिया में नजर आते हैं, लेकिन सीनियर्स द्वारा युवाओं का शोषण किए जाने से ढेर सारे लोग अपने-अपने घरों को लौट जाते हैं।
मैं सोचता हूं कि हमारे सीनियर्स को मार्गदर्शक बनना चाहिए, न कि राजनीतिज्ञ। माफी चाहूंगा कि आज मुझे यह बात अपने पत्रकार साथियों को याद करानी पड़ रही हैं। लेकिन अब यह जरूरी है क्योंकि हमीं में से कुछ लोग इतने स्वार्थी हो जाते हैं कि किसी दूसरे की कामयाबी को रोकने के लिए अपने स्तर को नीचे गिरा लेते हैं। इसके कारण जाने कितने युवा पत्रकार पत्रकारिता के क्षेत्र में कामयाबी न पाने की शर्म के कारण समाज के लोगों के बीच बैठना पसंद नहीं करते। इस बात को आपके समक्ष रखने का मुख्या उदेश्य यही है कि भविष्य में आपकी कोई गलती किसी के जीवन को गलत रास्तों पर न धकेल दे। अगर आपके आस-पास किसी का शोषण हो रहा है तो उसे रोकने की कोशिश करें। उम्मीद है जो मैं कहना चाह रहा हूं वह आप समझ रहे होंगे।
धन्यवाद
रघु राजारिपोर्टर, दैनिक उतम हिंदू
अमृतसर

written by MRIGYA, March 11, 2010
written by vicky , March 10, 2010
written by ashu, March 09, 2010
written by mayank jain, March 09, 2010
written by deepesh jain, March 09, 2010
written by gauri narang , March 09, 2010
written by sapan yagyawalkya, March 09, 2010
written by Rishi Naagar, March 08, 2010
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