फुटेज और काम में खो जाती है इन्सानियत : उम व करियर में कोई बहुत बड़ा तजुरबा न होने के बाद भी जिन्दगी ने न कई ऐसे मोड़ दिखाए जिसने सोच को काफी प्रभावित किया. देश की राजधानी में क्राइम बीट कवर करते वक्त हत्या और लूट जैसी घटनाएं आम बात सी लगने लगती हैं. पर उस दिन की घटना ने अंदर से हिला दिया. बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर हो गया. जो उस रात हुआ, उसे सोचकर आज भी परेशान हो उठता हूं. 10 नम्बर 2009. सर्दी की रात. लगभग दस बजे थे. हम आफिस में थे. खबर आई की नोएडा के सेक्टर 39 में एक तेज रफ्तार मारूती स्विफ्ट गाड़ी ने सड़क के किनारे सो रहे नौ लोगों को कुचल डाला. अफरातफरी में चैनल से निकला. पहुंचते ही देखा कि मौके पर एक ही परिवार के दो लोग और एक बच्चे की देह सड़क पर पड़ी है.
चैनल से लगातार फोन घनघना रहे थे. बिना वक्त गंवाए अपने काम में लग गया. वाकथ्रू के साथ कुछ अलग करने की कोशिश करता रहा. देखते ही देखते मीडिया वालों का जमावड़ा हो गया. सब अपनी उपयोगिता दिखाने में लगे थे. घटनास्थल से चार कदम दूर एक छोटा सा नाला भी था. नाले से लेकर घटना स्थान तक टहलते हुए सारी जानकारी लगातार लाइव व वाकथ्रू में बता रहे थे. चैनल से वापस आने का फोन आने पर हम लौट आए. खबर लिखने के बाद कुछ दोस्तों का फोन आया. घटनास्थल के पास एक चाय की दुकान में चाय पीने चल दिए. नाइट शिफ्ट होने की वजह से खबरों के लिए वहीं से दिल्ली जाने का विचार बनाया. घटना को तकरीबन चार घण्टे बीत चुके थे. पर अब भी उस हादसे की तस्वीरें रह रह कर जहन में आ रही थी.
अभी हम घटना स्थल पर पहुंचे ही थे कि अचानक एक व्यक्ति नोएडा पुलिस के एक सिपाही को लेकर वहां पहुचा. अंधेरा होने के कारण वे लोग कुछ देख नहीं पा रहे थे तो हमने अपने कैमरामैन से लाइट जलाने को कहा. उस व्यक्ति का कहना था कि उसका एक छोटा भाई, जो यहीं सो रहा था, घटना के वक्त से ही गायब है. लाइट जलाने के बाद जब नाले में ध्यान दिया तो एक लाशनुमा कोई चीज तैरती दिखी. डण्डे से हिला कर देखा गया तो सचमुच लाश ही निकली. देखकर अंदर तक हिल गए. लगा, कई आसमानों की बिजली एक साथ बदन में घुस गई. एक्सीडेंट के बाद से ही सारी मीडिया के साथ हम लोग भी लगातर वहां मौजूद थे. पर दिमाग में सिर्फ रिपोर्ट करने का जुनून था, खबर बताने का काम था.
उसी नाले के पास कई बार हम लोगों ने वाकथ्रू किया पर खबर के अलावा कुछ नहीं दिखा. बाद में पता चला कि मरने वाले की उम 20 के आसपास थी. हादसे के वक्त वो झोपड़ी के बाहर खड़ा था. उसी दौरान तेज रफ्तार कार की टक्कर से उसकी टांगें और बाजू टूट गए. इस वजह से वो छोटे से नाले में गिरा और डूब गया. उसने बचने की भरसक कोशिश की होगी पर वह बच नहीं पाया. उसी दौरान मीडिया के लोग थे जिनके शोरगुल के कारण संभवतः उस युवक की आवाज दब सी गई. अगर वहां मौजूद 40-50 मीडिया वालों में से किसी की भी आंखें कुछ और देख पाती तो शायद वो बच सकता था.
लेखक स्टीफन पी7न्यूज में कार्यरत हैं.

written by Robin Singh, March 13, 2010
written by shankar suman, March 12, 2010
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Main is article likhne wale ko bhi encourage karta hoon kyonki usne kam se kam ye likhkar apna dukh to to vyakt kiya aur ise padkar kayi logo ki manodasha badlegi aur wo bhi race se hatkar sochenge.
Zaroorat hai bas soch badalne ki...................