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सूखा सूखा कितना सूखा

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अभिज्ञात: पत्रकारिता की दुनिया में व्याप्त विसंगतियों को उजागर करती एक कहानी : वह अदना सा अंशकालिक पत्रकार था। एक बड़े अख़बार का छोटा सा स्ट्रिंगर। उसका ख़बरों की क़ीमत शब्दों के विस्तार पर तय होती थी, ख़बरों की गहराई और महत्त्व पर नहीं। जिस ख़बर के जुगाड़ में कई बार उसका पूरा दिन लग जाता उसकी लम्बाई कई बार तीन-चार कालम सेंटीमीटर होती।

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सुब्रत राय सहारा के जीवन पर किताब

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: पुस्तक समीक्षा : 'मुझे याद है- दादाभाई और हमारा परिवार' : पुस्तक ‘मुझे याद है' दादाभाई और सहारा परिवार के कर्ताधर्ता सुब्रत रॉय सहारा, जो कि प्यार से ‘सहाराश्री’ के नाम से जाने जाते हैं, के जीवन और समय पर केन्द्रित है। पुस्तक की लेखिका हैं श्रीमती कुमकुम रॉय चौधरी, जो कि उनकी छोटी बहन हैं और उन्हें प्यार से ‘दादाभाई’ कह कर सम्बोधित करती हैं। सहारा इंडिया परिवार में 'छोटी दीदी' स्वयं एक वरिष्ठ एग्ज़ीक्यूटिव होने के साथ ही लोकप्रिय सामाजिक हस्ती हैं जो अपनी बहुआयामी व लोकहितैषी सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं।

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ये निहायत ही रचना विरोधी समय है

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: कथाकार शेखर जोशी चंद्रयान पुरस्कार से सम्मानित : कोलकाता में आयोजित एक समारोह में प्रख्यात आलोचक व जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य, कला व संस्कृति गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है।

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'हंस' के कार्यक्रम में शामिल न होंगी अरुंधति!

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'हंस' के सालाना आयोजन की जो रूप-रेखा प्रचारित की गई है, उसमें सबको यह आभास दिया गया कि इस बार पुलिस अधिकारी विश्वरंजन और अरुंधति राय को एक ही मंच पर लायेंगे. कई लोगों में इस पर बड़ा आक्रोश था. खासकर वाम खेमे के लोग तमाशा खड़ा करने के राजेंद्र यादव के मंसूबे से बेहद क्षुब्ध दिखे. कुछ लोगों ने अरुंधति राय को खबर कर इस संभावित तमाशे की ओर ध्यान खींचा.

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87 पार नन्द बाबू का लेखन धारदार

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नंद बाबू1960 के पहले और बाद के दौर में अपनी रचनाओं के जरिये कभी समाजवादी तो कभी कलावादी सोच को सींचने वाले 87 साल उम्र के प्रख्यात साहित्यकार और कवि नन्द चतुर्वेदी आज भी सार्थकता के साथ बने हुए हैं। उन्होंने वाद प्रतिवादों के झंझटों से स्वयं को मुक्त मानते हुए समानान्तर रूप में आशावादी चिन्तन की द्योतक अपनी कविताओं को आगे बढ़ाया है।

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रिटायर हो गए वीरेनदा

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वीरेनदावीरेन डंगवाल उर्फ वीरेनदा बरेली कालेज से रिटायर हो गए. 30 जून का दिन वीरेन डंगवाल के लिए कई मायनों में न भूलने वाला रहा. एक तो यह कि उनका उनके प्यारे बरेली कालेज से कई दशकों का सीधा नाता टूट गया. अब भावनात्मक रिश्ता ही रहेगा. और, इसी 30 जून के दिन वीरेन दा ने अपने शहर बरेली में पहली बार कविता पाठ किया. गर्मी की छुट्टियों के कारण 30 जून को बरेली कालेज बंद रहा, सो, वीरेन डंगवाल के रिटायरमेंट पर कोई आयोजन नहीं किया जा सका.

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पत्रकारिता को अंतरानुशासनिक भी होना पड़ेगा

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: उदयपुर में बनास का लोकार्पण समारोह : साहित्य संस्कृति के संचयन 'बनास' के विशेषांक ''गल्पेतर गल्प का ठाठ'' का लोकार्पण फतहसागर झील के किनारे स्थित  बोगेनवेलिया आर्ट गेलेरी परिसर में एक गरिमामय आयोजन में हुआ. काशीनाथ सिंह के उपन्यास 'काशी का अस्सी' पर केन्द्रित इस अंक का लोकार्पण सुविख्यात चित्रकार पीएन चोयल, चर्चित चित्रकार अब्बास बाटलीवाला, वरिष्ठ कवि नन्द चतुर्वेदी और वरिष्ठ समालोचक नवल किशोर ने किया.

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'राजेन्द्र बोहरा स्मृति काव्य पुरस्कार' के लिए आवेदन आमंत्रित

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राजस्थान के कवि एवं मीडियाकर्मी राजेन्द्र बोहरा की स्मृति में स्थापित पांचवे राजेन्द्र बोहरा स्मृति काव्य पुरस्कार के लिये आवेदन आमंत्रित हैं. यह पुरस्कार हिंदी कविता के प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह के लिये दिया जाता है. पुरस्कार की राशि पांच हजार रुपये है.

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