
हिन्दुस्तान, बरेली से कॉपी एडिटर सुमित अवस्थी ने इस्तीफा दे दिया है. सुम...
दैनिक भास्कर के झारखंड में प्रकाशन को लेकर भास्कर के एक अन्य मालिक ने जो मु...
पत्रकारिता छोड़कर पत्रकारिता शिक्षण से जुड़ने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुभाष गुप...
टीवी99 के एक रिपोर्टर ने भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित इसी चैनल के एक स्ट्रिंगर ...
प्रिय यशवंत जी, मैं आपको जो लिख के भेज रहा हूं, वो बिलकुल सही है. मैं खुद उ...
आवेश जी, सबसे पहले तो धन्यवाद. आपने पत्रकारिता जगत में महिलाओं की वास्तविक स्थिति के बारे में लिखा . पिछले तीन महीनों से मुझे नौकरी नहीं मिल पा रही. सारी डेस्क और हर तरह की रिपोर्टिंग का अनुभव होने के बावजूद कुछ ऐसी शर्तें रख द...
: दुबे जी हमारे लिए प्रेरणास्रोत बन गए थे : दुबे जी ने कहा था- आप लोग शुरू करो, दिल्ली से हर संभव मदद का वायदा करता हूं। अफसोस, उनके सपनों को हम छोटी-मोटी कोशिशों से साकार कर पाते, इससे पहले वह चले गए। उम्र के इस मुकाम पर पहुंच...
हिंदी आज हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रही है. देश-विदेश में काफी ऐसे लोग हैं जो हिं...
''अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा, का ए हमार बाबू''. इस कविता ने एक बूढ़ी मां के कोख के ...
: पत्रकार आलोक नंदन का नया प्रोजेक्ट : पटना से संचालित होगा यह पोर्टल : दिल्ली समेत कई शहरो...
: पत्थर से कूच कर की गई हत्या : गुस्साए पत्रकार बैठे धरने पर : उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज...
: पत्रकारिता की दुनिया में व्याप्त विसंगतियों को उजागर करती एक कहानी : वह अदना सा अंशकालिक प...
श्रमजीवी पत्रकारों के वेतनमान को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए वेज बोर्ड की दिल्ली म...
इंटरव्यू : एडवोकेट अजय मुखर्जी 'दादा' : एक ही जगह पर तीन तीन तरह की वेतन व्यवस्था : अखबारों की तरफ से मुझे धमकियां मिलीं और प्रलोभन भी : मालिक करोड़ों में खेल रहे पर पत्रकारों को उनका हक नहीं देते : पूंजीपतियों के दबाव में कांट...
: साहित्य में शोषितों की आवाज मद्धिम पड़ी : अब कोई पक्ष लेने और कहने से परहेज करता है : अंधड़-तूफान के बाद भी जो लौ बची रहेगी वह पंक्ति में स्थान पा लेगी : समाज को ऐसा बनाया जा रहा है कि वह सभी विकल्पों, प्रतिरोध करने वाली शक्तिय...




हाईस्कूल, तांत्रिक सेक्स और अमेरिकी टीनएजर : दयाशंकर शुक्ल सागर
अव्वल दर्जे के धैर्यवान और सहृदय श्रोता थे अज्ञेय : ओम थानवी
ख्वाब ही नहीं, बेरोजगारों की जुगाड़ भी है पत्रकारिता : ऋषि दीक्षित
सोमदत्त को क्यों नागवार लगी दिग्विजय की बात : रमेश कुमार रिपु
टीवी पर ज्योतिष विद्या और उजला कौव्वा काला बंदर : अनिकेत प्रियदर्शी
कला में रंग-रेखाओं की फिजूलखर्ची अज्ञेय को गवारा न थी : ओम थानवी