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भोजपुरी के झंडा तोहरा हाथ में बा : केदारनाथ सिंह

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''अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा, का ए हमार बाबू''. इस कविता ने एक बूढ़ी मां के कोख के दर्द को उकेर दिया। मनोज भावुक ने काव्य पाठ शुरु किया तो पूरा माहौल, शहीद बेटे की बूढ़ी मां के व्यथा को सुन नम हो गया। मनोज की इस कविता ने वरिष्ठ कवियों का दिल जीत लिया।

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खून की आखिरी बूंद तक लड़ूंगा - जेठमलानी

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: जातीय जनगणना के खिलाफ विशाल मार्च : जातिवाद फैलाना देशद्रोह- जाखड़ : जनगणना में जाति को शामिल करने के विरोध में "सबल भारत" द्वारा संचालित "मेरी जाति हिंदुस्तानी आंदोलन" ने आज विशाल मार्च का आयोजन किया. सैकड़ों, छात्र , लेखकों, पत्रकारों, बुद्घिजीवियों, उद्योगपतियों, किसानों ने बाराखंबा रोड से जंतर-मंतर तक मार्च किया.

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नक्सलवाद पर खुलकर हुई बात

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: दूसरी वर्षगांठ पर साधना न्यूज की पहल : रायपुर में जमा हुए नेता, पत्रकार व अधिकारी :  नक्सलवाद पर हर जगह तीखी बहस छिड़ी हुई है. हर कोई समस्या का हल तलाश रहा है.

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आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या के खिलाफ रैली 26 को

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: Rally to denounce the murder of RTI Activist Amit Jethwa : One more dead. Yet another person who raised his voice against corruption was killed. And  we remain silent. Politicians, parties, the government, officials, moneyed people and criminals have joined hands. They constitute a gang that is robbing the nation. Anyone who dares to raise his voice against this gang is killed.

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सभी पेड न्यूज की मलाई खा रहे : उदय शंकर

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: पत्रकारिता की मौत है पेड न्यूज : नई दिल्ली : निर्भीक पत्रकारिता के उत्‍सव (पत्रकारों को रामनाथ गोयनका एवार्ड दिए जाने) के बाद गुरुवार को रामनाथ गोयनका पुरस्‍कार समारोह के केन्‍द्र में पत्रकारिता का स्‍याह पक्ष भी आया. पत्रकारिता की साख को बेचने की प्रवृत्ति यानी पेड न्‍यूज पर परिचर्चा हुई. सवाल उठे कि क्‍या इस मसले पर खामोशी की राजनीति चल रही है. इस बुराई के पीछे राजनेताओं का कितना योगदान है.

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संगोष्ठी में उठे पत्रकारिता के चरण और आचरण पर सवाल

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पत्रकारिता का चरण बहुत शक्तिशाली रहा है और आचरण पर जो उंगलियां उठ रही हैं उसका समाधान सामूहिक प्रयास से होगा. यह विचार वरिष्ठ पत्रकार ईशदत्त ओझा ने व्यक्त किया. वे प्रेस क्लब में दैनिक भारतीय बस्ती के स्‍थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी- 'पत्रकारिता के चरण और आचरण' को सम्बोधित कर रहे थे. पत्रकारिता के क्रमिक विकास की चर्चा करते हुये उन्होंने कहा कि समय का अपना सत्य है और समाज से ही सभी धारायें निकली हैं. पत्रकारिता उससे भिन्न नहीं है. जब समाज का चरित्र बिगड़ेगा तो पत्रकारिता ही नहीं समाज का कोई भी क्षेत्र हो उससे मुक्त नहीं हो सकता. ईशदत्त ओझा को स्वर्गीय हरिश्‍चन्‍द्र अग्रवाल स्मृति सम्मान 2010 से श्री अग्रवाल के पुत्र संजय अग्रवाल और पत्रकारों द्वारा सम्मानित किया गया.

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गांधी दर्शन से ही दुखों से मुक्ति

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: असगर अली इंजीनियर का उदबोधन : उदयपुर : हिंसा मानव स्वभाव है, मानव की प्रकृति है लेकिन सत्य पर डटे रहने, इच्छाओं के शमन तथा लोभ, लालच की मुक्ति से अहिंसा को जिया जा सकता है। इसके लिए सत्ता व शक्ति को प्राप्त करने के मोह को छोडकर मानव सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाना होगा। यह विचार प्रसिद्ध सुधारवादी चिंतक डॉ. असगर अली इंजीनियर ने डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।

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खबर लिखने की कीमत चुका रहे पत्रकार

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: स्वतंत्र पत्रकार हेमचंद पांडेय की कथित मुठभेड़ पर उठे सवाल : 'अघोषित आपातकाल में पत्रकारों की भूमिका' विषय पर संगोष्ठी : नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में जर्नलिस्ट फॉर पीपुल की ओर से ‘अघोषित आपातकाल में पत्रकारों की भूमिका’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें आर्य समाज के नेता और समाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने कहा कि आज देश में आपातकाल जैसी स्थितियां हैं। और ऐसी स्थितियां कमोबेश हर दौर में रहती हैं।

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