''अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा, का ए हमार बाबू''. इस कविता ने एक बूढ़ी मां के कोख के दर्द को उकेर दिया। मनोज भावुक ने काव्य पाठ शुरु किया तो पूरा माहौल, शहीद बेटे की बूढ़ी मां के व्यथा को सुन नम हो गया। मनोज की इस कविता ने वरिष्ठ कवियों का दिल जीत लिया।






